बिहार म्यूटेशन अपील ऑनलाइन: दाखिल-खारिज रिजेक्ट होने पर DCLR कोर्ट में केस कैसे दर्ज करें?

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बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री के बाद, सरकारी रिकॉर्ड में क्रेता (खरीदार) का नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया को ‘दाखिल-खारिज’ या ‘म्यूटेशन’ कहा जाता है। यह एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसके बिना जमीन पर आपका कानूनी स्वामित्व अधूरा माना जाता है। आवेदन की प्रक्रिया अब ऑनलाइन हो गई है, जिसे अंचलाधिकारी (Circle Officer – CO) के स्तर पर निष्पादित किया जाता है। लेकिन कई बार विभिन्न कारणों से अंचलाधिकारी आपके दाखिल-खारिज के आवेदन को अस्वीकृत (Reject) कर सकते हैं।

ऐसी स्थिति में निराश होने की आवश्यकता नहीं है। कानून आपको इस निर्णय के विरुद्ध अपील करने का अधिकार देता है। इस अपील को ‘दाखिल-खारिज अपील वाद’ कहा जाता है। यह अपील भूमि सुधार उप समाहर्ता (Deputy Collector Land Reforms – DCLR) के न्यायालय में दायर की जाती है। आइए, इस पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझते हैं।

यानि DCLR दाखिल ख़ारिज(Mutation) अपील वाद दायर तब की जाती है जब किसी व्यक्ति का दाखिल-खारिज आवेदन किसी कारण से अस्वीकार (reject) कर दिया जाता है। यह अस्वीकृति आम तौर पर अंचलाधिकारी (Circle Officer) के स्तर पर होती है।

यदि आपने अपनी जमीन का दाखिल-खारिज कराने के लिए आवेदन किया है और अंचलाधिकारी ने उस आवेदन को अस्वीकार कर दिया है, तो आप इस फैसले के खिलाफ DCLR दाखिल ख़ारिज(Mutation) अपील वाद दायर कर सकते हैं। आवेदन अस्वीकार होने के कुछ सामान्य कारण हो सकते हैं, जैसे:

  • दस्तावेज़ों में कोई कमी या गलती होना।
  • जमाबंदी में नाम सही न होना या पुराना रिकॉर्ड उपलब्ध न होना।
  • बंटवारे के कागजात सही न होना।
  • खाता -खेसरा में त्रुटी होना |
  • किसी अन्य पक्ष द्वारा आपत्ति (Objection) दर्ज करना।
  • आवेदन करते समय ऑनलाइन फॉर्म में कोई गलती हो जाना।
  • कहाँ करें: दाखिल-खारिज की अपील आपके अनुमंडल (Sub-division) में बैठने वाले भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के न्यायालय में दायर की जाती है। DCLR का कार्यालय सामान्यतः अनुमंडल कार्यालय परिसर में ही होता है।
  • कब करें: अंचलाधिकारी द्वारा दाखिल-खारिज आवेदन अस्वीकृत करने के आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर आपको अपील दायर कर देनी चाहिए। यदि किसी विशेष कारण से 30 दिन से अधिक की देरी हो जाती है, तो आपको विलंब का उचित कारण बताते हुए एक अलग से आवेदन देना पड़ सकता है, जिसे स्वीकार करना या न करना DCLR के विवेक पर निर्भर करेगा।

अपील दायर करते समय निम्नलिखित दस्तावेजों को तैयार रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  1. अपील आवेदन पत्र: एक सादे कागज पर या टाइप कराकर DCLR के नाम एक आवेदन तैयार करें। इसमें अपना पूरा नाम, पता, अस्वीकृत दाखिल-खारिज वाद संख्या, और अंचलाधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अपील करने के सभी कारणों का स्पष्ट उल्लेख करें।
  2. अंचलाधिकारी के आदेश की प्रमाणित प्रति: यह सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। आपको CO कार्यालय से दाखिल-खारिज अस्वीकृत करने वाले आदेश की एक प्रमाणित प्रति (Certified Copy) निकलवानी होगी।
  3. निबंधन पत्र (रजिस्ट्री डीड / केवाला): जिस जमीन का दाखिल-खारिज रुका है, उसकी रजिस्ट्री डीड की एक स्व-अभिप्रमाणित छायाप्रति (Self-attested photocopy)।
  4. अद्यतन लगान रसीद: जमीन की नवीनतम (up-to-date) लगान रसीद की छायाप्रति।
  5. पहचान पत्र: आवेदक का आधार कार्ड या कोई अन्य सरकारी पहचान पत्र।
  6. वकालतनामा: यदि आप यह प्रक्रिया किसी वकील के माध्यम से कर रहे हैं, तो उनके पक्ष में एक वकालतनामा आवश्यक होगा।

1. पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और लॉगिन (शुरुआती कदम)

सबसे पहले आपको बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (biharbhumi.bihar.gov.in) पर जाना होगा।

  • नागरिक लॉगिन: होमपेज पर ‘नागरिक लॉगिन’ के विकल्प पर क्लिक करें।
  • पंजीकरण (Registration): यदि आप पहली बार आए हैं, तो ‘Registration’ बटन पर क्लिक कर अपना नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और पता दर्ज करें। यदि आपने पहले कभी म्यूटेशन या परिमार्जन के लिए आईडी बनाई है, तो दोबारा बनाने की जरूरत नहीं है।
  • लॉगिन: अपना मोबाइल नंबर और कैप्चा डालकर ‘Login’ करें। आपके नंबर पर आए OTP को दर्ज कर ‘Confirm’ करें।

2. राजस्व न्यायालय (Revenue Court) का चयन

लॉगिन होने के बाद डैशबोर्ड पर आपको कई सेवाएँ मिलेंगी।

  • आपको “राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली” (Revenue Court Management System) वाले विकल्प पर क्लिक करना है।
  • यहाँ आपको कई न्यायालयों की सूची दिखेगी। चूंकि आप सीओ के फैसले के खिलाफ जा रहे हैं, इसलिए आपको “भूमि सुधार उपसमाहर्ता न्यायालय” (DCLR Court) का चयन करना होगा।

3. म्यूटेशन अपील केस दर्ज करना

न्यायालय चुनने के बाद एक नया पेज खुलेगा। यहाँ बाईं ओर (Left Sidebar) आपको ‘Apply Case’ के अंदर ‘Mutation Appeal’ का विकल्प दिखाई देगा। इस पर क्लिक करें।

  • क्षेत्र का चयन: अपना जिला, अनुमंडल (Sub-division) और अंचल (Block) चुनें।
  • पुराने केस का विवरण: अब आपको अपने उस दाखिल-खारिज का ‘Case Number’ और ‘Financial Year’ (जैसे 2024-25) डालना होगा जिसे सीओ ने रिजेक्ट किया है।
  • Search/Proceed: जैसे ही आप ‘Proceed’ करेंगे, स्क्रीन पर आपके रिजेक्टेड केस की पूरी जानकारी (जैसे आवेदक का नाम, खाता-खेसरा) दिखने लगेगी।

4. याचिकाकर्ता (Petitioner) और विपक्षी (Respondent) का विवरण

  • Petitioner Details: यहाँ आवेदक का नाम लिखें (कोशिश करें कि वही नाम हो जिसके नाम से दाखिल-खारिज आवेदन था)। अपना मोबाइल नंबर डालकर OTP से उसे Verify जरूर करें। इसके बिना फॉर्म आगे नहीं बढ़ेगा। अपना पूरा पता और ईमेल दर्ज करें।
  • Respondent Details: यह भाग बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आपकी जमीन पर किसी पड़ोसी या रिश्तेदार ने आपत्ति (Objection) जताई थी, तो उनका नाम और पता यहाँ लिखें। यदि सीओ ने किसी तकनीकी कमी (जैसे कागज अधूरा होना) के कारण रिजेक्ट किया है और कोई विपक्षी नहीं है, तो आप यहाँ “Not Applicable” लिख सकते हैं।

5. देरी का कारण (Condonation of Delay)

नियम के अनुसार, रिजेक्शन के 30 दिनों के भीतर अपील करनी होती है। यदि आप देरी से आवेदन कर रहे हैं, तो ‘Condonation of Delay’ सेक्शन में कारण बताना होगा।

  • आप ‘Poverty’ (गरीबी), ‘Illness’ (बीमारी) या ‘Other’ विकल्प चुन सकते हैं। ‘Other’ चुनने पर बॉक्स में स्पष्ट लिखें कि देरी क्यों हुई।

6. याचिका का सारांश (Summary of Petition)

यहाँ आपको कम से कम 20-50 शब्दों में अपना पक्ष रखना है।

  • उदाहरण: “श्रीमान, मेरा दाखिल-खारिज केस संख्या (नंबर) को अंचल अधिकारी द्वारा इस आधार पर रद्द किया गया कि वंशावली स्पष्ट नहीं है, जबकि मेरे पास वैध कागजात मौजूद हैं। अतः आपसे प्रार्थना है कि इस पर पुनर्विचार कर म्यूटेशन की अनुमति दें।”

7. महत्वपूर्ण दस्तावेज़ अपलोड करना (PDF Upload)

अपील की सफलता आपके दस्तावेजों पर निर्भर करती है।

  • दस्तावेजों की सूची: केवाला की कॉपी, रिजेक्शन ऑर्डर की कॉपी (सीओ का आदेश), वंशावली (यदि आवश्यक हो), और लगान रसीद।
  • फाइल साइज: इन सभी दस्तावेजों को स्कैन करके एक Single PDF बना लें, जिसका साइज 2 MB से कम हो। इसे पोर्टल पर अपलोड करें।

8. फाइनल सबमिट और टोकन नंबर

सब कुछ भरने के बाद ‘Save’ पर क्लिक करें। एक पॉप-अप आएगा, उसे ‘OK’ करें। अब आपकी स्क्रीन पर एक टोकन नंबर (Token Number) जनरेट होगा।

इस नंबर को नोट कर लें। यही आपका केस नंबर बनेगा जिसके जरिए आप भविष्य में सुनवाई की तारीख और स्टेटस चेक कर पाएंगे।

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